मधुरेंद्र पाण्डे



वो एक शब्द 

जो मेरे-तुम्हारे बीच

बहुत तन्हा है

आज उस शब्द को

आकाश की चादर दे दो

दे दो गहराई

एक शांत समंदर जैसी

दे दो देना हो तो

इस रिश्ते को

अब नाम कोई

बहुत चुभता है

कहीं दिल के किसी कोने में

वो शब्द

जो मेरे-तुम्हारे बीच

बहुत तन्हा है
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