Posts

Showing posts from October, 2011

अरमान

Image
कभी एहसास के दामन को आंसू से भिगो देना
कभी हसरत की मिट्टी में सुनहरे ख्वाब बो देना।
मैं चाहत की चमकती राह पर सदियों से तन्हा हूं
कभी फुरसत में मेरे ख्वाब को इक आसमां देना।

समंदर पूछता रहता है मुझसे तेरी बातों को
ये लहरें छू के मुझको पूछती हैं तेरी यादों को
मैं क्या कह दूं चरागों की तरह ख़ामोश बैठा हूं
मैं कैसे खोल दूं दिल की मोहब्बत के लिफाफों को

समंदर के किनारे पर बिछा मैं रेत का बिस्तर
कभी जब दिल करे इस पर कोई सिलवट सजा देना।

कभी एहसास के दामन को आंसू से भिगो देना
कभी हसरत की मिट्टी में सुनहरे ख्वाब बो देना।

मुझे तो चांद या तारे कभी अच्छे नहीं लगते
मुझे ये झिलमिलाते रात में जुगनू नहीं जंचते
मैं क्या मांगूं ख़ुदा से सोचता रहता हूं रातों को
मेरे ख़्वाबों के दामन में तेरे ही अक्स हैं सजते

हूं मैं इक फूल जो अपने ही कांटों से हुआ घायल
फकत शबनम की ख्वाहिश है, अगर जो हो सके देना।

कभी एहसास के दामन को आंसू से भिगो देना
कभी हसरत की मिट्टी में सुनहरे ख्वाब बो देना।

सुलगती जुस्तजू, भटके हुए जज्बात हैं मेरे
कि पतझड़ की तरह बिखरे हुए अंदाज़ हैं मेरे
मुकम्मल-नामु्कम्मल हूं अभी मैं कह नहीं सकता
बस इस मासूम हसरत की तर…